पाठ्यक्रम: GS2/राजव्यवस्था और शासन; शिक्षा
संदर्भ
- हाल ही में सरकार ने स्पष्ट किया है कि सीबीएसई से संबद्ध विद्यालयों में कक्षा 7, 8 और 9 में अध्ययनरत विद्यार्थी, कक्षा 10 पूर्ण करने तक त्रिभाषा सूत्र के अंतर्गत विदेशी भाषाओं का अध्ययन जारी रख सकेंगे।
त्रिभाषा सूत्र नीति के बारे में
- इस नीति का उद्देश्य भारत में बहुभाषिकता, राष्ट्रीय एकता तथा भाषाई विविधता को प्रोत्साहित करना है।
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: त्रिभाषा सूत्र की प्रथम अनुशंसा कोठारी आयोग (1964–66) द्वारा की गई थी।
- इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी), 1968 में अपनाया गया तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 1986/1992 में पुनः दोहराया गया।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी), 2020 में इसे पुनः विशेष रूप से महत्व दिया गया।
- एनईपी 2020 के अनुसार: विद्यार्थियों को तीन भाषाओं का अध्ययन करना होगा, जिसमें भाषा चयन की पर्याप्त लचीलापन होगा।
- तीन भाषाओं में से कम-से-कम दो भाषाएँ भारत की मूल भाषाएँ होनी चाहिए।
- किसी भी राज्य पर कोई भाषा अनिवार्य नहीं की जाएगी।
- भाषाओं का चयन राज्यों, क्षेत्रों तथा विद्यार्थियों की आवश्यकताओं के अनुरूप किया जाएगा।
प्रमुख निर्धारक एवं उद्देश्य
- बहुभाषिकता को प्रोत्साहन: विद्यार्थियों की भाषाई दक्षता का विकास करना।
- मातृभाषा के अतिरिक्त अन्य भाषाओं के अध्ययन को प्रोत्साहित करना।
- राष्ट्रीय एकीकरण: विभिन्न राज्यों के बीच संवाद एवं संपर्क को सुदृढ़ करना।
- ‘विविधता में एकता’ की अवधारणा को सशक्त बनाना।
- भारतीय भाषाओं का संरक्षण: संविधान के अनुच्छेद 29, 350A एवं 351 के अनुरूप भाषाई संरक्षण की संवैधानिक जिम्मेदारी को पूरा करना।
- शास्त्रीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन को प्रोत्साहित करना।
- संज्ञानात्मक एवं शैक्षिक लाभ: एनईपी 2020 के अनुसार बहुभाषी शिक्षा विद्यार्थियों की संज्ञानात्मक क्षमता तथा आलोचनात्मक चिंतन कौशल को बढ़ाती है।
- रोजगार एवं गतिशीलता में वृद्धि: भारत में उच्च शिक्षा तथा रोजगार के अवसरों का विस्तार करने में सहायक।
- विभिन्न क्षेत्रों में शैक्षिक एवं व्यावसायिक गतिशीलता को बढ़ावा देना।
नीति से संबंधित प्रमुख चुनौतियाँ एवं चिंताएँ
- भाषा अनिवार्य किए जाने की आशंका: विशेषकर दक्षिण भारत के कुछ राज्यों को हिंदी अनिवार्य किए जाने की आशंका बनी हुई है।
- संघीय ढाँचे से जुड़ी चिंताएँ: शिक्षा संविधान की सातवीं अनुसूची की समवर्ती सूची का विषय है, इसलिए राज्य भाषा नीति निर्धारण में अधिक स्वायत्तता चाहते हैं।
- भाषा शिक्षकों की कमी: अनेक विद्यालयों में विभिन्न भारतीय भाषाओं के प्रशिक्षित शिक्षकों का अभाव है।
- कार्यान्वयन संबंधी चुनौतियाँ: ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यालयों में आवश्यक आधारभूत संरचना तथा शिक्षण सामग्री का अभाव।
- समय-सारिणी निर्धारण तथा पहले से बोझिल पाठ्यक्रम जैसी व्यावहारिक कठिनाइयाँ।
- समान अवसर से संबंधित समस्याएँ: सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों को निजी विद्यालयों की तुलना में कम भाषा विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं।
- भाषाई विकल्पों में असमानता से शैक्षिक विषमताएँ बढ़ सकती हैं।
- विद्यार्थियों पर अतिरिक्त शैक्षणिक भार: अनेक भाषाओं का अध्ययन विद्यार्थियों के शैक्षणिक दबाव में वृद्धि कर सकता है।
नीति संबंधी प्रमुख चिंताओं के समाधान हेतु हालिया पहल
- एनईपी 2020 में लचीलापन: नीति स्पष्ट करती है कि किसी भी राज्य के लिए कोई भाषा नहीं अनिवार्य नहीं की जाएगी।
- राज्यों तथा विद्यार्थियों को भाषा चयन में पर्याप्त स्वतंत्रता प्रदान की गई है।
- राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF): क्षेत्रीय विविधताओं को ध्यान में रखते हुए बहुभाषी शिक्षा को प्रोत्साहित करती है।
- गृहभाषा/मातृभाषा में प्रारंभिक साक्षरता पर विशेष बल दिया गया है।
- मातृभाषा आधारित शिक्षा को प्रोत्साहन: एनईपी के अनुसार जहाँ संभव हो, कक्षा 5 तक (और अधिमानतः कक्षा 8 तक) शिक्षा का माध्यम गृहभाषा अथवा मातृभाषा होना चाहिए।
- भाषा शिक्षकों का प्रशिक्षण: शिक्षा मंत्रालय एवं एनसीईआरटी बहुभाषी शिक्षण सामग्री तथा भाषा शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित कर रहे हैं।
- प्रौद्योगिकी का उपयोग: दीक्षा (DIKSHA) जैसे डिजिटल मंचों पर अनेक भारतीय भाषाओं में शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।
- विभिन्न भारतीय भाषाओं में ई-लर्निंग सामग्री का विकास किया जा रहा है।
भारत में शिक्षा से संबंधित अन्य प्रमुख पहलें
- निपुण भारत : आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक दक्षता को बढ़ावा देना।
- पीएम श्री विद्यालय योजना : एनईपी 2020 के अनुरूप आदर्श विद्यालयों का विकास।
- समग्र शिक्षा : पूर्व-प्राथमिक से कक्षा 12 तक की समेकित विद्यालयी शिक्षा योजना।
- दीक्षा प्लेटफ़ॉर्म: विभिन्न भारतीय भाषाओं में डिजिटल शिक्षण संसाधन।
- राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) 2023: बहुभाषिक एवं दक्षताआधारित शिक्षा को बढ़ावा।
- एक भारत श्रेष्ठ भारत पहल: राज्यों के मध्य सांस्कृतिक एवं भाषाई आदान-प्रदान को प्रोत्साहन।
आगे की राह : पहलों को और सशक्त बनाना
- सहकारी संघवाद को प्रोत्साहन : भाषा नीति का निर्माण केंद्र एवं राज्यों के बीच व्यापक परामर्श और सहयोग से किया जाना चाहिए।
- अधिक लचीलापन: क्षेत्रीय आवश्यकताओं एवं स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप विद्यार्थियों को अधिक भाषा विकल्प उपलब्ध कराए जाएँ।
- भाषा शिक्षकों की क्षमता का विकास: सभी भारतीय भाषाओं के दक्ष शिक्षकों की भर्ती एवं गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण सुनिश्चित किया जाए।
- बहुभाषी शिक्षण सामग्री का विकास: सभी अनुसूचित भाषाओं में उच्च गुणवत्ता वाली पाठ्यपुस्तकों तथा डिजिटल शिक्षण सामग्री का विकास किया जाए।
- प्रौद्योगिकी का प्रभावी उपयोग: बहुभाषी शिक्षा को सुदृढ़ करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित अनुवाद उपकरणों तथा डिजिटल मंचों का व्यापक उपयोग किया जाए।
- मातृभाषा आधारित शिक्षा: मातृभाषा में मजबूत आधारभूत शिक्षा के साथ-साथ बहुभाषिक दक्षता को भी समान रूप से प्रोत्साहित किया जाए।
Previous article
संक्षिप्त समाचार 26-06-2026